मोतिहारी, फरवरी 7 -- रक्सौल, हिसं। हरी व्यापक सर्वत्र समान यानि भगवान कण कण में व्याप्त है। उक्त बातें स्थानीय एयरपोर्ट मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा का आरम्भ करते हुए प्रसिद्ध कथा वाचक अनुरूद्धाचार्य जी ने कही। उन्होंने इस पर व्यापक प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार के जीव व निर्जीव के मूल में बीज होता है। भगवान कहते हैं कि मैं बीज हूँ यानि कण कण में व्याप्त हूं। अनुरूद्धाचार्य जी ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचन के माध्यम से कहा कि भागवत कथा केवल श्रवण की कथा नहीं, बल्कि जीवन को परिवर्तित करने वाली कथा है, जो मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और अहंकार से भक्ति की ओर ले जाती है। अनुरूद्धाचार्य जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। कहा कि श्रीराम ने हनुमान, विभीषण और शबरी जैसे न...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.