कानपुर, दिसम्बर 8 -- सरवनखेड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का सहारा कही जाने वाली मनरेगा योजना से मजदूरों का मोहभंग हो रहा हैै। हर हाथ को काम की गारंटी का दम भरने वाली योजना की कमियां भी उजागर हुई हैं। कम मजदूरी, भुगतान में देरी, काम का अभाव और बिचौलियों के शिकंजे में फंसकर पांच सालों में 40 हजार मजदूरों ने मनरेगा से नाता तोड़ा है। सरकार मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार देने का वादा करती है। मनरेगा योजना संचालन करने की जिम्मेदारी ग्राम रोजगार सेवको के ऊपर है। कार्य को कराना मजदूरी का भुगतान कराना इसके बाद भी उनका ही भुगतान खुद नहीं मिल पाना मनरेगा योजना को सुचारू रूप से संचालन कराने में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इस वक्त मौसम अनुकूल होने के बाद भी गांवों में काम मिलना सबसे बड़ी चुनौती है। अगर गांवों में विकास कार्य होते भी हैं तो मजदूरी का भ...
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