रांची, दिसम्बर 22 -- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हुए बदलाव के बाद झारखंड को अगले वित्तीय वर्ष से 1500 करोड़ रुपये का वित्तीय भार होने की संभावना है। अब तक केंद्र सरकार मनरेगा की मजदूरी दर भुगतान करती है। इसमें केंद्र और राज्य का 90-10 का अनुपात है, लेकिन अब नए नियम के तहत 60-40 का अनुपात होगा। इससे राज्य को अतिरिक्त राशि अपने मद से वहन करनी होगी। झारखंड में मनरेगा के तहत 76 लाख से ज्यादा जॉब कार्ड जारी किए गए हैं, लेकिन 50 फीसदी से भी कम 34 लाख जॉब कार्ड ही सक्रिय हैं। यही स्थिति मजदूरों की भी है। 107 लाख श्रमिक हैं, जबकि 40 लाख मजदूर ही सक्रिय हैं। सक्रिय मजदूरों में सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति के 26.65 लाख श्रमिक और अनुसूचित जनजाति के 26.65 लाख श्रमिक शामिल हैं। श्रमिकों को उनके काम के बदले सरकार की ओर...