देवघर, दिसम्बर 24 -- मधुपुर। स्थानीय राजबाड़ी रोड़ अवस्थित गिरजाघर यूरोपीय शैली में बना है। गिरजाघर में लगा रंगीली टाइल्स और मार्बल्स स्थानीय ईसाई समाज के अतीत की समृद्धि को दर्शाता है। चर्च की मीनार और नक्काशीदार लकड़ी की खिड़की, दरवाजा, डेस्क आज भी यथावत है। बताया जाता है कि वर्ष 1872 के आसपास अंग्रेजों ने इस गिरजाघर को बनवाया था। संत कोलंबस गिरजाघर निर्माण कर ईसाई समुदाय के लोग सामूहिक रूप से प्रार्थना करते थे। तब गिरजाघर में समय-समय पर आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन भी होता था। गिरजाघर की घंटी की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती थी। समय के साथ काफी बदलाव आया है। कालांतर में करीब दो दशक तक गिरजाघर में आराधना बंद हो गई थी। वर्ष 1978 में पादरी हारून सिंह ने कलीसिया को एकमत कर गिरजाघर में नियमित प्रार्थना आराधना शुरू की। वर्षों से बिना सरकारी सह...
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