बगहा, फरवरी 13 -- बगहा/वाल्मीकिनगर,हसं/एप्र। भारत- नेपाल सीमा से सटे नेपाल के महलवारी में लगने वाला मदारशाह मेला इस वर्ष भी सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता की मिसाल बनकर उभरा। यहां अजान के साथ भजन की धुन भी गूंजती है। सूफी परंपरा से जुड़े इस मेले में हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचने लगे हैं। श्रद्धा, आस्था और भाईचारे के रंग में रंगा यह मेला सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है। मान्यता है कि मदारशाह बाबा (वास्तविक नाम वहीउद्दीन कुतबुल शाह) लगभग तीन सदी पूर्व अफगानिस्तान से यहां आकर पहाड़ियों में साधना में लीन हुए थे। उस समय के शासक राजा पाल्पालिसेन के दौर में जमींदार माधव पंजियार और शेर बहादुर अमात्य ने उनकी तपोस्थली के लिए भूमि दान की थी। बाबा के वर्तमान गुरु-शिष्ट मौलाना अमिरूललाह अंसारी के अनुसार, साधनाकाल में बाबा...
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