मथुरा, जुलाई 30 -- धनुर्विद्या हमारी प्राचीन विद्याओं में से एक है। राजा-महाराजाओं के राजकुमार ही नहीं युद्ध कला में पारंगत करने के लिए अन्य बच्चों को गुरुओं के यहां भेजा जाता था। जहां रहकर वह धनुर्विद्या सीखते थे। मथुरा में भी धनुर्विद्या के महारथी हैं, जो न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी मथुरा और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यह हाल तब है, जब इन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही। हिन्दुस्तान के बोले मथुरा संवाद में इन तीरंदाजों का कहना है कि सरकारी मदद मिले तो वे अपनी प्रतिभा को और निखार सकते हैं। उत्तर प्रदेश की दूसरी आवासीय एवं आगरा मंडल की एक मात्र निजी तीरंदाजी प्रशिक्षण एकेडमी अड़ींग के छोटे से मजरा कंचनपुर में खेत खलिहानों के बीच संचालित हो रही है। इसमें प्रदेश के तमाम जिलों के साथ अन्य प्रदेशों के भी बालक-बालिका तीरंदाजी का प्रशिक्...
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