रांची, सितम्बर 12 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट आना उचित नहीं है। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने कहा कि जब एक पक्ष के पास सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय उपलब्ध हों, तो पहले निचली उच्च अदालत यानी सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। मामला धर्म कुमार साव उर्फ धर्म कुमार गुप्ता और अन्य की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है। इन आरोपियों ने 2014 के एक शिकायत मामले में डिस्चार्ज अर्जी दायर की थी, लेकिन मजिस्ट्रेट ने फरवरी 2023 में इसे खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने सीधे हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी। अदालत ने आरोपियों की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी, लेकिन उन्हें यह छूट दी कि वे सत्र न्याय...
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