गया, दिसम्बर 20 -- सूफी संत हजरत सय्यद अबरार शाह वारसी रहमतुल्लाह अलैह के वार्षिक उर्स के दूसरे और अंतिम दिन अकीदतमंदों ने वारसी चादर के साथ भव्य जुलूस निकाला। यह जुलूस पंचानपुर गांव से शुरू होकर पूरे बाजार का भ्रमण करते हुए वापस मजार शरीफ पहुंचा। जुलूस के दौरान जायरीन दरूद-ओ-सलाम का नजराना पेश करते हुए चल रहे थे। चादरपोशी में गया, पटना, जहानाबाद, अरवल, शेरघाटी, सिवान, कोलकाता, डाल्टेनगंज (झारखंड) से अकीदतमंदों ने हाजिरी दी। कई लोगों ने अपनी मन्नतें पूरी होने पर मजार पर चादर चढ़ाई और शिरनी बांटी। उर्स की शाम कव्वाली के नाम रही। नेपाल से आए मशहूर कव्वाल एजाज वारसी और हकीक वारसी ने अपनी गायकी से समां बांध दिया। उनके कलामों 'बरसत रंग है हसनी हुसैनी', 'अनवारे मुहम्मद है मुखड़ा मेरे वारिस का' और 'मुझे चढ़ गया वारसी रंग' पर श्रोता झूमने को मजबूर ह...