समस्तीपुर, दिसम्बर 7 -- मस्तीपुर। जिला मुख्यालय में करीब आधा दर्जन जगहों पर हर रोज मजदूरों की मंडी सजती है। काम के लिए मजदूर हर रोज खुद की 'बोली' लगाने के लिए मजबूर हैं। जिसका जितना कम रेट उसको काम मिलने की उतनी गारंटी। शहर के विभिन्न जगहों पर मजदूरों का हर सुबह मेला लगता है। सरकारी आंकड़ों की बाजीगरी के चलते विशेष पैकेज और एक सौ दिन काम की गारंटी देने वाली योजना मनरेगा भी यहां कारगर साबित नहीं हो रहा है। बोले समस्तीपुर कार्यक्रम के तहत मजदूरों ने अपनी समस्याओं को बताया। वकील पासवान ने कहा कि सप्ताह में अगर तीन दिन भी काम मिल जाये तो परिवार का भरण-पोषण हो सके। लेकिन स्थिति तो यह है कि एक से दो दिन ही काम ही मिलता है। रमेश महतो बताते हैं कि जब से उन्होंने होश संभाला है इस जगह काम के लिए पहुंच रहे हैं। कभी-कभी ऐसा भी हुआ है प्रतीक्षा के बाद ...