दरभंगा, जून 19 -- मक्का उत्पादक किसानों में उदासी छायी है। किसानों का कहना है कि मक्के की अच्छी फसल से हर वर्ष लाभ उम्मीद जगती है, पर वाजिब दाम नहीं मिलता। जी-तोड़ मेहनत से उपजी मक्के की फसल को विवश होकर कम कीमत पर बिचौलियों के हाथों बेचना पड़ता है। किसान बताते हैं कि मोटे अनाज अर्थात मिलेट्स में मक्का पीला सोना कहलाता है। बिस्कुट, एथनॉल, मुर्गा व मछली चारा आदि बनाने वाले उद्योगों में मक्के की भारी डिमांड है। इसके चलते नामी-गिरामी ट्रेडिंग कंपनियां मक्के की खरीदारी करती हैं। इसके बावजूद किसान भारी लाभ से वंचित रहते हैं। किसान इसका जिम्मेवार सिस्टम को ठहराते हैं। बताते हैं कि सरकारी सिस्टम के सुस्त रहने से ही बिचौलिए हावी हैं। जिला प्रशासन को मक्का उत्पादक किसानों के लिए विशेष नीति बनानी चाहिए। किसान महेंद्र यादव, संजय कुमार झा, विपिन कुमार ...
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