भागलपुर, जनवरी 30 -- भागलपुर, मुख्य संवाददाता। बांग्लादेश में बिहार के मक्के की लगभग नो-एंट्री ने किसानों की कमर तोड़ दी है। महाजनों से लिए कर्ज को चुकाने के लिए मक्का कृषक औने-पौने दाम में भी बेचने को मजबूर हैं। दो-तीन माह बाद भदई मक्का बोने का वक्त आ जाएगा। ऐसे में होली से पहले पिछले सीजन की मकई को कोठी से खाली करने की मजबूरी आ गई है। कई किसान ऐसे हैं जो गेहूं कटने के बाद से ही खरीफ मक्के की खेती की योजना बनाने लगते हैं। खरीफ मक्का प्रमुख वर्षा आधारित फसल है, जो मई के अंत से जून (मानसून की शुरुआत) में बोई जाती है। 'हिन्दुस्तान' ने बांग्लादेश के बिगड़े रिश्ते से चिंतित कई मक्का किसानों की तकलीफ जानी। किसानों ने दो टूक बताया कि यदि रिश्ते नहीं सुधरे तो मकई की खेती घाटे का सौदा साबित हो जाएगी। बांग्लादेश से तनातनी को देखते हुए निर्यातक की ...
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