सहरसा, फरवरी 25 -- सलखुआ/ संवाद सूत्र, धर्मेंद्र नायक। क्षेत्र में कोसी तटबंध के भीतर फैला फरकिया दियारा हर साल मक्का के सीजन में सुर्खियों में आ जाता है। वजह वही पुरानी-घने मक्का के पौधे, जो अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं। राहगीरों और स्थानीयग्रामीणों के बीच एक अनकहा भय पसरा रहता है कि कब, कहा और किसके साथ वारदात हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इलाके में लंबे समय से आपसी वर्चस्व को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच तनाव और गोलीबारी की घटनाए होती रही हैं। हालांकि, फिलहाल प्रमुख गुटों के सरगना सलाखों के पीछे हैं, लेकिन जमीन पर डर का माहौल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालिया घटनाओं ने इस आशंका को और मजबूत किया है। 13 मई 2024 को पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कनरिया और चिरैया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बताए गए गुप्त ठिकानो...
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