नई दिल्ली, अगस्त 6 -- केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भ्रष्टाचार मामलों में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए पूर्व मंजूरी अनिवार्य करने संबंधी भ्रष्टाचार रोधी कानून का प्रावधान 'निर्भीक शासन उपलब्ध कराने का प्रयास है। सरकार ने न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ को सूचित किया कि 'निर्भीक सुशासन भी किसी संवैधानिक शासन का एक मूलभूत हिस्सा है। इसके बाद, पीठ ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस धारा के तहत, भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि (धारा) 17ए, जिस तरह से प्रस्तुत किया गया है, वह निर्...
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