भोपाल।, फरवरी 13 -- प्रख्यात चिंतक और विचारक सुरेश सोनी ने कहा कि वर्तमान अकादमिक चिंतन यूरोप केंद्रित है। इस विचार का ग्रेविटेशनल फोर्स भारत के बाहर है। यूरोप में विषयों का वर्गीकरण ऐसा किया गया है जो भारत में नहीं है। शोध के लिये इसे भारत केंद्रित बनाना होगा। भारत की शोध दृष्टि समग्रता में है, विषयों को खंड-खंड देखने की नहीं है। सोनी दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा मेपकास्ट में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026 के उद्घाटन क्षेत्र में बीच वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध के लिए दृष्टि, उत्तरदायित्व और कार्य योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। विकसित भारत के लिए विभिन्न विषयों में शोध और इस विचार के महत्व को स्पष्ट किया उन्होंने कहा कि हमारा शोध न तो पुराने की छाया हो और ना ही रूस और अमेरिका की प्रतिकृत...
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