नई दिल्ली, जुलाई 28 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही में भूस्वामियों के अधिकार को और मजबूती देते हुए कहा कि 'यदि एक समान भूमि के खरीद-बिक्री के कई उदाहरण सामने हैं तो उच्च उदाहरण के प्रामाणिक लेनदेन पर विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 1990 के दशक में औद्योगिक विकास के लिए खेती योग्य जमीन के अधिग्रहण से जुड़े मामले में मुआवजे की रकम में 82 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए यह फैसला दिया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने 'बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें भूस्वामियों को 32,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था। पीठ ने अब जमीन के प्रमुख स्थान पर स्थित होने, गैर-कृषि क्षमता और राज्य राजमार्ग से सटे होने जैसे क...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.