रांची, जनवरी 5 -- रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड की ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की अध्यक्षता में रांची में सोमवार को मनरेगा और वीबी-जीराम-जी के प्रावधानों को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में मनरेगा और वीबी-जीराम-जी के प्रावधानों की गहन समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि 100 दिनों की वैधानिक रोजगार गारंटी को 125 दिन करने का प्रस्ताव जमीनी हकीकत से दूर और भ्रामक है। श्रम बजट के स्थान पर नॉर्मेटिव एलोकेशन, मजदूरी दर का केंद्रीकरण और 60 दिनों का अनिवार्य मोराटोरियम झारखंड जैसे श्रमिक-प्रधान राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में भूमिहीन मजदूर हैं, जिनके लिए ये प्रावधान आजीविका पर सीधा प्रहार है। इससे पलायन, भुखमरी और सामाजिक असुरक्षा का खतरा बढ़ेगा...