नई दिल्ली, नवम्बर 26 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। दुर्लभ खनिज चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट) से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी मिलने से इस क्षेत्र में आयात निर्भरता घटेगी। भारी उद्योग मंत्रालय का कहना है कि इस योजना के जरिए भारत में प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन दुर्लभ चुंबक (आरईपीएम) विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारत वैश्विक आरईपीएम बाजार में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभरेगा। दुर्लभ चुंबकों के उत्पादन को लेकर उद्योग जगत उत्साहित है। कई कंपनियां उत्पादन करने को सहमत हैं। मौजूदा समय में देश में जितनी भी दुर्लभ चुंबकें उपलब्ध होती हैं, वह आयात होकर आती हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि दुर्लभ खनिज चुंबक चीन और जापान समेत उन देशों से मंगाए जा रहे हैं, जिनके साथ भारत के समझौते हैं। मंत्...
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