गोरखपुर, दिसम्बर 16 -- गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर की ओर से चल रहे गुरुदीक्षा कार्यक्रम में प्रो. लावण्या कीर्ति सिंह ने प्राचीन शिक्षा केंद्रों तक्षशिला, नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालयों में संगीत शिक्षा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख किया। कहा कि भारतीय संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा है, बल्कि यह संस्कार, अनुशासन एवं समग्र व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावशाली माध्यम रहा है। उन्होंने चाणक्य, विक्रमादित्य, भिखारी ठाकुर तथा शेक्सपियर जैसे विद्वानों एवं रचनाकारों के उदाहरणों के माध्यम से प्राचीन संगीत एवं नाट्य परंपरा को रेखांकित किया। पूर्व राज्य मंत्री प्रो. डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश के विकास में निर्णायक भूमिका निभाएगी, जिसके लिए कौशल विकास, स्टार्टअप स...