नई दिल्ली, जनवरी 1 -- हर्षवर्धन शृंगला,पूर्व विदेश सचिव व सांसद हम नए साल में प्रवेश कर गए हैं। इस समय दुनिया में अनिश्चितता, शक्ति संतुलन में बदलाव और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा की स्थिति बनी हुई है। साल के पहले दिन ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ताइवान संबंधी बयान ने स्पष्ट कर दिया कि यह वर्ष काफी जटिल स्थितियां जनने जा रहा है। जिनपिंग का दो टूक लहजे में यह कहना कि ताइवान का चीन में विलय होकर रहेगा और ताइवानी राष्ट्रपति का अपनी संप्रभुता से किसी किस्म का समझौता करने से इनकार करना साल 2026 में टकराव की आशंकाओं की एक बानगी भर है। ऐसे माहौल में भारत की विदेश नीति पर सबकी निगाह रहने वाली है। हालांकि, अपने उद्देश्य की स्पष्टता, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय-वैश्विक हितों को साधने वाली साझेदारियों के प्रति हमारी नीति पूरी तरह साफ है...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.