प्रयागराज, जनवरी 9 -- केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के गंगानाथ झा परिसर में आयोजित पांच दिनी राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. हरिदत्त शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में अनुसंधान की व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के शाब्दिक अर्थ की व्याख्या करते हुए इसके निर्माण और विकास में संस्कृत के प्रभाव को स्पष्ट किया। कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शोध की अपार संभावनाएं हैं। प्रो. रामनाथ झा ने भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान समय का सर्वाधिक रुचिकर विषय बताते हुए इसकी समृद्धता पर चर्चा की। निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कार्यशाला को औपचारिक शोध के साथ-साथ नई संभावनाओं के अन्वेषण का सशक्त माध्यम बताया। इस अवसर पर प्रो. रामकृष्ण पांडेय 'परमहंस', प्रो. मनोज कुमार मिश्र, डॉ. सुरेश पांडेय, ड...
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