दरभंगा, दिसम्बर 5 -- दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. श्यामल किशोर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा तब तक पूर्ण नहीं हो सकती जब तक हम मिथिला ज्ञान परंपरा की समझ विकसित नहीं कर लेते। उक्त क्रम में मंडन मिश्र, अयाची मिश्र, वाचस्पति मिश्र, उदयानार्च जैसे विचारको का नाम अग्रणी रूप से आता है। टीपीएस कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर सह रामेश्वर कॉलेज, मुजफ्फरपुर के प्रधानाचार्य प्रो. किशोर ने मिथिला की धरती को कर्मकांडीय परंपरा, तर्क परंपरा, वाद-विवाद परंपरा के जननी के रूप में रखा। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. शिवानंद झा ने पंडित अयाची मिश्र की कृतियों एवं उनके विचारों को मिथिला की सांस्कृतिक व दार्शनिक धरोहर बताया। विषय प...