गया, नवम्बर 30 -- वर्तमान परिदृश्य में 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को समझने के साथ-साथ उसे अध्ययन और अध्यापन में अपनाने की आवश्यकता है। वर्षों से चले आ रहे औपनिवेशिक दृष्टि को बदलने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को सभी विषयों में संपृक्त और संश्लेषित करने की आवश्यकता है। उक्त वक्तव्य दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय बौधिक्स श्रृंखला के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तकों के विमोचन समारोह में कही। कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से सम्बंधित सभी विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा का अपना विशिष्ट स्थान है लेकिन औपनिवेशिक दुराग्रह के कारण हमें इसके बारे में...
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