पूर्णिया, जनवरी 31 -- बैसा, एक संवाददाता।प्रखंड क्षेत्र के अनगढ़ हाट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिवस कथा स्थल पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी रहा और पूरा पंडाल भक्तों से खचाखच भर गया। कथा व्यास की भावपूर्ण विवेचना ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अत्यंत प्रसन्न, भाव-विभोर सुनते दिखे। श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास मेरुदेवा भारती ने गोवर्धन लीला को अत्यंत विस्तार, भाव और गूढ़ अर्थों के साथ प्रस्तुत किया। श्रीकृष्ण ने समझाया कि वर्षा, अन्न और जीवन केवल किसी देवता की कृपा से नहीं, बल्कि धर्मपूर्वक किए गए कर्म और प्रकृति के संतुलन से प्राप्त होते हैं। हमारी आजीविका गोवर्धन पर्वत, वन, जल, घास और गौओं पर निर्भर है। प्रकृति कोई भोग की वस्तु नहीं, जीवनदायिनी माता है। इसलिए सबसे पहले उसी प्रकृति की ...