लखनऊ, दिसम्बर 24 -- हाता रामदास सदर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य विष्णु शरण भारद्वाज जी महाराज ने कुंती स्तुति का वर्णन करते हुए कहा कि विपत्ति में भगवान को याद करना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने बताया कि कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से विपत्ति का वरदान इसलिए मांगा था क्योंकि दुख में ही ईश्वर का निरंतर स्मरण होता है। सुख में मनुष्य अक्सर भगवान को भूल जाता है। प्रवचन के उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। शुकदेव जी का आगमन हमें सिखाता है कि वैराग्य और भक्ति के बिना मोक्ष संभव नहीं है।
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