गौरीगंज, फरवरी 4 -- अमेठी। नरैनी क्षेत्र में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास विनोदानंद सरस्वती ने सांसारिक मोह से ऊपर उठकर प्रभु भक्ति अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव जी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि तक्षक सर्प के श्राप के बाद जब परीक्षित ने जीवन के अंतिम समय में मोक्ष का मार्ग जानना चाहा तब शुकदेव जी ने उन्हें भगवान की भक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और सत्संग से ही मनुष्य जीवन सफल होता है। विदुर और मैत्रेय ऋषि के संवाद का वर्णन करते हुए उन्होंने सदाचार और ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला। मुख्य यजमान राम धीरज पाण्डेय और उनकी पत्नी मंजुला पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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