रिषिकेष, जनवरी 31 -- कथाव्यास हरिदास महाराज ने कहा कि सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेक बाल लीलाएं कीं, जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को सहज आकर्षित करती हैं। जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि कहलाते हैं। शनिवार को त्रिवेणी घाट स्थित श्री वीरवर दायक काले हनुमान मंदिर, गौतम कुंज की संस्थापिका ब्रह्मलीन माता जनक किशोरी दासी की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक हरिदास महाराज ने संगीतमय कथा वाचन के माध्यम से प्रभु की बाल लीलाओं के चरित्रों का सजीव चित्रण किया। उन्होंने कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होता है। अभिमान और स्वयं सुखी रहने की इच्छा क्रिया कहलाती है, जबकि बिना किसी कर्तव्याभिमान के दूसरों को सुखी रखने की भावना को लीला कहा जाता ...
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