जौनपुर, फरवरी 7 -- जफराबाद (जौनपुर), हिन्दुस्तान संवाद।भागवत कथा मनुष्य को मोह-माया से मुक्ति की प्रेरणा देती है। राजा परीक्षित ने मृत्यु का भय होने के बावजूद अपना सर्वस्व त्याग कर मोक्ष का मार्ग चुना। यह बातें शुक्रवार की शाम क्षेत्र के तालामझवारा पड़ान गांव में श्रीमद भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महापुराण के पांचवें दिन कथावाचक पंडित निलेश महाराज वेंकटेश ने कही। उन्होंने कहा कि अहंकार का त्याग ही भक्ति की पहली सीढ़ी है। जब इंद्र को अपनी शक्ति का अहंकार हो गया और उन्होंने ब्रज को डुबोने का प्रयास किया, तब नन्हे कान्हा ने सात कोस के गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भगवान केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं, अहंकार के नहीं। कथा स्थल पर गोवर्धन पर्वत की झांकी सजा...
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