नई दिल्ली, जनवरी 15 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर किसी मामले में व्यक्ति का मृत्यु-पूर्व भरोसेमंद अंतिम बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) मौजूद है, तो ठोस सबूत न होने पर भी यह अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने चमन लाल को अपनी पत्नी सरो देवी पर केरोसिन डालकर आग लगाने के मामले में बरी किए जाने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। पीठ ने कहा कि मकसद का महत्व मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामलों में होता है। सुप्रीम कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें चमन लाल को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मृत्यु पूर्व अंतिम बयान पर संदेह जताते हुए उसे बरी किया गया था। हाई...
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