नई दिल्ली, फरवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि इस बात पर भरोसा करना ​​मुश्किल है कि एक विवाहित महिला को शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने के लिए उकसाया गया था। शीर्ष अदालत ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दुष्कर्म के आरोप में दर्ज मुकदमा रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस अदालत ने बार-बार कहा है कि सिर्फ व्यक्ति ने शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हर मामले में यह दुष्कर्म का अपराध होगा। पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 375 के तहत अपराध तभी बनता है, जब आरोपी ने शादी का वादा सिर्फ यौन संबंध बनाने के लिए सहमति लेने के मकसद से किया हो और शुरू से ही उसका इरादा वादा पूरा करने का न हो। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ...