गोरखपुर, फरवरी 4 -- गोरखपुर, निज संवाददाता। रामगढ़झील के किनारे स्थित चंपादेवी पार्क में आयोजित राम कथा के आठवें दिन मंगलवार को राजन जी महराज ने भरत का चरित्र और शबरी के प्रेम का भावुक प्रसंग सुनाया। राजन जी ने कहा कि भरत द्वारा राम चरण पादुकाओं को मांगने और उन्हें सिर पर धारण कर अयोध्या लाकर स्थापित किया गया। उन्होंने बताया कि इस तरह से शासन का संचालन अनुपम त्याग की श्रेणी में आता है। उनका कहना है कि यह केवल एक भक्त ही कर सकता है। भरत का चरित्र भाइयों में प्रेम और त्याग का भाव रखने की प्रेरणा देता है। कथा व्यास ने भरत जी को अयोध्या के कुल को प्रकाशित करने वाले दीपक की तरह बताया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति विश्वास के साथ प्रतीक्षा करता है तो भगवान को भी आना पड़ता है। इस बीच भजनों के माध्यम से शबरी द्वारा आंसुओं से प्रभु के चरण पखारने एवं...