नई दिल्ली, जनवरी 22 -- वसंत पंचमी न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और प्रकृति के नवजीवन का उत्सव भी है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वसंत पंचमी अलग-अलग नामों से मनाई जाती है। दक्षिण में इसे 'श्री पंचमी' कहा जाता है। पंजाब में यह पर्व पतंग उत्सव के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में पहली वसंत पंचमी पर दंपति पीले वस्त्र पहनकर मंदिर दर्शन करते हैं। राजस्थान में लोग चमेली के फूलों की मालाएं धारण करते हैं। वसंत पंचमी को 'मदनोत्सव' भी कहा जाता है। इसलिए यह पर्व प्रेम, आकर्षण और सौंदर्य का उत्सव भी माना जाता है। इस समय वृक्ष अपने पुराने पत्ते त्याग देते हैं। यह उत्सव सूफी परंपरा में भी विशेष स्थान रखता है। मध्यकाल में सूफी संत अमीर खुसरो ने हिंदू संस्कृति से प्रेरित होकर सूफी दरगाहों पर वसंत मन...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.