नई दिल्ली, जनवरी 12 -- ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रह को मन, भावनाओं, माता, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की तरलता का कारक माना जाता है। कुंडली में अगर चंद्र कमजोर, पीड़ित, नीच राशि में, शत्रु ग्रहों से दृष्ट या अशुभ भाव में स्थित हो, तो व्यक्ति का मन हमेशा भटकता रहता है। एकाग्रता नहीं बनती, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन आता है, नींद की कमी होती है, डर-चिंता बनी रहती है और सेहत भी बार-बार बिगड़ती है। पेट, छाती, आंखें, रक्तचाप, पानी से जुड़ी बीमारियां और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। अगर आप भी यही महसूस कर रहे हैं कि मन कहीं स्थिर नहीं बैठता और सेहत लगातार खराब रहती है, तो संभव है आपकी कुंडली में चंद्र कमजोर हो। आइए जानते हैं इसके लक्षण और मजबूत करने के सरल ज्योतिषीय उपाय।कमजोर चंद्र के मुख्य लक्षण - मन और शरीर दोनों पर असर कुंडली ...