नई दिल्ली, फरवरी 14 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भगोड़ा आरोपी जो जानबूझकर अदालती कार्यवाही/कानूनी प्रक्रिया से बचता है, वह मामले में सह आरोपी को बरी हो जाने के आधार पर अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि फरार आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने से न सिर्फ एक गलत परंपरा को जन्म देगा बल्कि समाज में यह गलत संदेश भी जाएगा और अदालती कार्यवाही से भागने की प्रवृति को बढ़ावा भी मिलेगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और विजय बिश्नोई की पीठ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है, जिसमें फरार घोषित आरोपी को इस आधार पर अग्रिम जमानत दे दी थी कि संबंधित मामले के सह आरोपी को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करते हुए कह...