रामगढ़, फरवरी 17 -- रामगढ़, निज प्रतिनिधि छावनी परिषद मैदान में ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के 18वें दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए डॉ. स्वामी युगल शरण ने कहा कि सच्ची भक्ति वह है, जिसमें भक्त भगवान से संसार, सुख या मोक्ष नहीं, बल्कि स्वयं भगवान को ही मांगता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोक्ष की कामना भी भक्ति में बाधा है, क्योंकि यह भी एक प्रकार की स्वार्थपूर्ण इच्छा है। स्वामी जी ने कहा कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-इन चार पुरुषार्थों से आगे एक पंचम पुरुषार्थ है, जिसे प्रेम या निष्काम भक्ति कहा जाता है। भक्ति की प्रमुख शर्तों में मोक्ष या ब्रह्मलोक तक के सुख की इच्छा का त्याग, कर्म, ज्ञान के आवरण से भक्ति को मुक्त रखना और सांसारिक वस्तुओं की कामना से दूर रहना शामिल है। उन्होंने कहा कि जब ...