मुजफ्फरपुर, मई 24 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। भगवान से बड़ा अपना कोई नहीं होता। मुश्किल समय में अपने परिवार के लोग तो क्या अपना शरीर भी साथ छोड़ने लगता हैं। ये बातें वृंदावन से आए प्रख्यात कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने शुक्रवार को राधानगर पताही चौसीमा फोरलेन स्थित मधुबनी में मुजफ्फरपुर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित दस दिवसीय विष्णु महायज्ञ में प्रवचन के दौरान कहीं। उन्होंने बताया कि जब महाभारत में भड़ी सभा में द्रौपदी का दुश्शासन चीरहरण कर रहा था, उस समय द्रौपदी को अपने पांच पतियों पर अभिमान था। मगर उन पांचों ने विरोध नहीं किया। उस समय वे असहाय महसूस कर प्रभु श्रीकृष्ण को याद करने लगी। उस समय प्रभु ने ही द्रौपदी की लाज बचाई। उन्होंने कहा कि प्रेम करना है तो भगवान से करो। उन्हीं के इशारे पर शृष्टि चलती है। राजा हो तो पुरुषोत्तम र...
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