सहरसा, मार्च 24 -- सहरसा, नगर संवाददाता ।श्री राम महायज्ञ श्री राम कथा के पांचवे दिन कथा वाचक आचार्य रामनयण जी महाराज ने श्रीराम के राज तिलक से वनवास तक की कथा सुनायी। उन्होंने कहा कि प्रभु राम दशरथ के चार पुत्र में सबसे बड़े पुत्र थे। वे अपने पिता की हर बातों का पालन करते थे। चारों भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें राजपाठ का भी ज्ञान था।वे अपने पिता का हाथ बंटाते थे। प्रभु राम जब बड़े हुए तो दशरथ के मन में एक ही बात थी कि वे अपने जीते जी राम को आयोध्या का राजा बना कर राज तिलक कर दें। दशरथ ने युवराज को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।पूरी आयोध्या श्री राम के राज तिलक को उतावली थी।इसी बीच माता कैकई ने दशरथ से वरदान मांगा। श्रीराम को वनवास व भरत का राज तिलक करने की बात कही। जैसे ही राजा महल से निकल दरबार में आए तो राजतिलक के स्थान पर श्...
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