गुड़गांव, नवम्बर 11 -- गुरुग्राम। सेक्टर-10 के हुडा मैदान में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित शिव कथा के तीसरे दिन कथा वाचक डॉ. सर्वेश्वर ने सती प्रसंग का सुमधुर भजनों व चौपाइयों के साथ व्याख्यान किया। भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी सती को संग लेकर अगस्त्य मुनि के आश्रम में प्रभु राम की पावन कथा श्रवण करने जाते हैं, परन्तु तर्कबुद्धि से प्रेरित हुईं सती कथा का मर्म ही नहीं जान पातीं। जिस कारण जब वह प्रभु श्रीराम को साधारण नर-लीला करते हुए देखती हैं तो उन्हें संशय आ जाता है कि वह ईश्वर जो परब्रह्म, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, मायारहित और इच्छारहित है, वह शरीर कैसे धारण कर सकता है। कथा वाचक ने कहा कि भगवान शिव स्वयं अपने मुख से बताते हैं कि ईश्वर तर्क-वितर्क, मन, वाणी और बुद्धि से अति परे है। तर्क बुद्धि से दिया जाता है और जिसकी बुद...