लखीसराय, फरवरी 27 -- कजरा, एक संवाददाता। पंचांग के अनुसार हर महीने में दो एकादशी पड़ती हैं और साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है। इन सभी एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। इसे बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है। इन्हीं एकादशी में से एक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे आमलकी एकादशी कहते हैं। आचार्य अशोक पांडे ने बताया कि आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन व्रत रखने का भी विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 9 मार्च 2025 को सुबह 07 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी और 10 मार्च 2025 को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को ही रखा जाएगा।
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