मेरठ, जनवरी 7 -- श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास डॉ. राम प्रकाश शास्त्री ने कथा श्रवण कराते हुए भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कंस का वध और श्री कृष्ण का विद्या ग्रहण करने उज्जैन जाने का प्रसंग सुनाया। सद्गुरु की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान भी जब मानव अवतार लेते हैं तो गुरु तो वह भी धारण करते हैं । बिना गुरु के कल्याण नहीं है। गुरु की महिमा का व्याख्यान करते हुए कहा कि माता सबसे बड़ी गुरु है। दूसरे पिता हैं। तीसरे स्थान पर आचार्य होते हैं। 64 दिन में भगवान श्री कृष्ण ने संदीपनी ऋषि के आश्रम में रहकर विद्या ग्रहण की। कथा व्यास ने भगवान श्री कृष्ण के विवाह का प्रसंग सुनाया। बुधवार को कथा का समापन दिवस है। इस दौरान उमेश, कमल, अनीता, हिमांशु, श्रीराम, अशोक, जीवन शास्त्री विराजित रहे।
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