लखीमपुरखीरी, दिसम्बर 8 -- धौरहरा, संवाददाता। संत फकीर दास स्मारक मठ परिसर में चल रही कथा के दौरान कथा व्यास पंडित गरुणध्वज बाजपेई ने कहा कि राजा दक्ष को प्रजापति बनने के बाद अहंकार हो गया था, उन्होंने सभी देवताओं से भगवान शंकर को अखिलेश्वर ज्ञानी की संज्ञा देते हुए अलग-अलग बातों से बहिष्कार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि बातों के बाण चलाने वाले को शत्रु कहते हैं। बाण के तमाम प्रकार होते हैं, जिसकी मार से बचना है तो भगवान देवाधिदेव महादेव भोलेनाथ की शरण में जाना चाहिए। कथा व्यास ने श्रोताओं से कहा कि भगवान को भोग लगाने के लिए एक रोटी के पांच टुकड़े करके तीन टुकड़े दाल में व दो टुकड़े सब्जी में मिलाकर पांच अलग-अलग देवी-देवताओं के नाम लेकर स्वाहा बोलने से देवों को प्रसाद प्राप्त हो जाता है और उस व्यक्ति व परिवार पर देवताओं की क्षत्रक्षाया ...
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