मुजफ्फरपुर, सितम्बर 15 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। खादी ग्रामोद्योग सर्वोदय ग्राम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन सोमवार को कथावाचक छोटे बापू ने श्रीकृष्ण के महारास, कंस वध, द्वारका निर्माण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि रसों का समूह ही रास कहलाता है। जैसे भोजन में षट-रस, काव्य में नव-रस होते हैं, वैसे ही जब सभी रस भगवान में समाहित होते हैं तो महारास का सुख प्राप्त होता है। संसार में मनुष्य भोजन, विषय और व्यवहार में रस ढूंढता है, लेकिन वह क्षणिक होता है। परम आनंद और परम सुख केवल भगवान की भक्ति से ही प्राप्त होता है। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 11 वर्ष 56 दिन तक वृंदावन में रहे। कंस ने यज्ञ के बहाने अक्रूर को भेजकर कृष्ण-बलराम को मथुरा बुलवाया। मथुरा वासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। भगवान ने माली सुदामा ...
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