सीतापुर, फरवरी 21 -- नैमिषारण्य। इंसान चाहे जितना भी ध्यान, दान कर ले, लेकिन उसको भक्ति रस का स्वाद तभी मिलता है जब भगवान की कृपा होती है। यह कहना है दीपेश्वर जी महाराज का। नैमिषारण्य में गोमती के किनारे स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा मैं उन्होंने श्रोताओं को भक्ति के रस से सराबोर किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य के मार्ग पर चलते हुए ही इंसान भक्ति को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में पति और पत्नी दोनों ही भक्ति भावना से ईश्वर की पूजा आराधना करते हैं वह घर स्वयं तीर्थ हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि पुत्र गुणवान है तो अपने पुत्र को ही गुरु बना लो कोई दिक्कत नहीं होती।

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