रामगढ़, फरवरी 5 -- रामगढ़, निज प्रतिनिधि। छावनी फुटबॉल मैदान में ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के छठवें दिन गुरुवार को डॉ स्वामी युगल शरण ने शरणागति के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान अकारण करुण हैं, फिर भी जब तक जीव उनकी शरण में नहीं जाता, तब तक कृपा प्रकट नहीं होती। भगवान की कृपा किसी मूल्य पर नहीं, बल्कि शरणागति की शर्त पर निर्भर है। स्वामी ने कहा कि अनादिकाल से मनुष्य माता-पिता, पुत्र, पति-पत्नी और संसार की शरण में तो जाता है, लेकिन भगवान की शरण नहीं लेता। यही कारण है कि कृपा का अनुभव नहीं हो पाता। शरणागति का अर्थ शरीर से नहीं, बल्कि मन से पूर्ण समर्पण है। शरीर, इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि सब कुछ भगवान को अर्पित कर देना ही वास्तविक शरणागति है। उन्होंने श्वेताश्वतरोपनिषद, गीत...