बस्ती, मई 15 -- दुबौलिया। बैरागल पूरेउपाध्याय में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रह्लाद प्रसंग का वर्णन किया। कथा व्यास पंडित प्रदीप पांडेय महाराज ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। जिसके सुनने मात्र से भक्त प्रह्लाद के कई कष्ट दूर हो गए थे। भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है, वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। ऐसे में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए। माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप...