बलिया, दिसम्बर 8 -- गड़वार। ब्लॉक क्षेत्र के दामोदरपुर गांव स्थित शिव मंदिर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को काशी से आए कथा वाचक पं.शीतल प्रकाश पाण्डेय ने गोकर्ण और धुंधकारी की कथा का रसपान कराया। उन्होंने बताया कि तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव और उनकी पत्नी धुंधुली रहती थी, वह झगड़ालू किस्म की थी। संतान नहीं होने के कारण पति परेशान रहते थे। आत्मदेव ने अपनी पीड़ा एक ऋषि को बताई तो ऋषि ने एक फल देकर कहा कि तुम यह फल पत्नी को खिला देना। आत्मदेव ने फल पत्नी को दिया। लेकिन पत्नी ने फल को नहीं खाया और उसे गाय को खिला दिया। धुंधुली ने अपनी बहन के बच्चे को ले लिया। आत्मदेव ने बच्चे का नाम धुंधकारी रखा। इसके बाद गाय ने भी एक बच्चे को जन्म दिया जो मनुष्य के रूप में था पर उसके कान गाय के समान थे। लिहाजा उसका नाम गोकर्ण रख ...
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