झांसी, नवम्बर 7 -- मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के गांव खिलारा में ब्रह्मकुंड कामदगिरि परिक्रमा मार्ग चित्रकूट धाम से आए संत त्रिलोकीनाथदास महाराज ने कहा कि भक्ति मार्ग पर चलना सरल नहीं होता। मन को भगवान की भक्ति में स्थिर कर पाने की साधना ही भजन कहलाता है। उन्होंने कहा, भजन केवल जप या गीत नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है। इसे करना, बचाना और पहचानना तीनों ही अत्यंत कठिन कार्य है। जब तक साधक में विनम्रता, समर्पण और अहंकार त्याग नहीं आता, तब तक सच्ची भक्ति संभव नही हो पाती है। भजन का अर्थ केवल ईश्वर का नाम जपना नहीं, बल्कि मन को पूर्णत: ईश्वर में लीन कर लेना है। सच्चा भजन वही है जिसमें व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार को समाप्त कर, समर्पण की भावना से ईश्वर को साधने का प्रयास करे। यही मार्ग सच्ची भक्ति और आत्मिक शांति की ओर ले जाता ...
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