गौरीगंज, फरवरी 14 -- मुसाफिरखाना। क्षेत्र के पूरे सूबेदार मानामदनपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य संतोष त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को भक्ति और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दीनबंधु भगवान के हाथ में अपना जीवन सौंप देने से मनुष्य बोझ रहित और आनंदमय हो जाता है। आचार्य ने बताया कि भागवत कथा की परंपरा स्वयं भगवान नारायण से प्रारंभ होकर शिव, नारद और आगे ऋषियों तक पहुंची। भगवान सत्, चित और आनंद स्वरूप हैं तथा समस्त सृष्टि में चैतन्य रूप से विद्यमान हैं। उन्होंने राजा परीक्षित के जन्म तथा कलियुग प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वर्ण और मद में कलियुग का वास होता है। मुख्य यजमान लालता प्रसाद पाण्डेय व शैल कुमारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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