किशनगंज, दिसम्बर 24 -- किशनगंज। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि जनसंख्या किसी भी सूबे की ताकत तभी बनती है, जब वह संतुलित और नियोजित हो। लेकिन जब आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ती है, तो वही जनसंख्या स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पोषण जैसी बुनियादी सेवाओं पर असहनीय दबाव डाल देती है। आज यह सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण अस्पतालों में भीड़, सीमित संसाधनों पर बढ़ता बोझ और परिवारों में आर्थिक अस्थिरता लगातार गहराती जा रही है। सबसे संवेदनशील स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब नवविवाहित दंपति जानकारी और परिपक्वता के अभाव में बहुत जल्दी माता-पिता बन जाते हैं। न मां का शरीर पूरी तरह तैयार होता है, न पति-पत्नी मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम। इसका दुष्परिणाम केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और व्यवस्था पर भी असर डालता है। इसी गंभीर चुनौती...
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