हल्द्वानी, जनवरी 30 -- हल्द्वानी, संवाददाता। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से एमबी इंटर कॉलेज ग्राउंड में आयोजित भगवान शिव कथा के दूसरे दिन व्यास डॉ. सर्वेश्वर ने समुद्र मंथन प्रसंग का वर्णन किया। शुक्रवार को कथा में व्यास ने बताया कि जब समुद्र मंथन से हलाहल कालकूट विष निकला तो जगत के कल्याण के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कण्ठ में धारण कर लिया। जिस कारण उनका एक नाम नीलकण्ठ भी पड़ गया। उन्होंने बताया कि शिव का नीलकण्ठ स्वरूप हमें त्याग व सहनशीलता का गुण जीवन में धारण करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने भीतर दया, प्रेम, त्याग व करुणा जैसे गुणों को विकसित करने चाहिए। ये तब ही सम्भव है जब ब्रह्मज्ञान के माध्यम से हम नीलकण्ठ का दर्शन अपने घट में प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर कथा पंडाल में महाशिवरात्रि महोत्सव भी धूमधाम से मनाया ग...