हरिद्वार, मार्च 16 -- हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर तैनात कुलियों के लिए जीवन अब पहले जैसा नहीं रहा। एक समय था, जब कुली बैच (बिल्ला) पाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन आज आधुनिकता ने उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। पहले इस पेशे में लगे कुलियों के लिए अब जीवन का यह क्रम मुश्किल हो गया है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक रिक्शा और ट्रॉली बैग ने उनकी मेहनत छीन ली है। कुलियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन पर 96 कुली कार्यरत हैं, जिनके साथ उनके परिवार जुड़े हुए हैं। प्रस्तुत है प्रवीण कुमार पेगवाल की रिपोर्ट.... हरिद्वार में कुलियों की तीसरी पीढ़ी भी इस पेशे से जुड़ी हुई है। लेकिन अब आधुनिकता के दौर में उनका काम और आमदनी दोनों ही खतरे में हैं। एस्केलेटर, लिफ्ट और ट्रॉली बैग जैसे उपकरणों के आने से उनका काम और भी मुश्किल हो गया है। पहले जो सामा...
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